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परिचय

जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार

 

जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार
परिचय:- भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सौजन्य से बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति, बीकानेर द्वारा जनवरी, 2001 से जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर का संचालन किया जा रहा है।
जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर की स्थापना सन् 2001-02 में हुई। भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सौजन्य से संचालित जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर का मुख्य उद्देश्य बीकानेर जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के निरक्षर, नवसाक्षर, अल्पश्क्षिित तथा आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े एवं वंचित वर्ग के लोगों को व्यावसायिक कौशल एवं जीवन संवर्द्धन शिक्षा में दक्ष कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है। जिससे वे राष्ट्रीय सरोकार की दिशा में अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह कर विकास की मुख्यधारा में अग्रसर हो सकें। जन शिक्षण संस्थान की पृष्ठभूमि के तहत उल्लेखित है कि सन् 1965 में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा श्रमिक विद्यापीठ के नाम से इस स्कीम की शुरूआत वरली, मुम्बई से की गई। सन् 2000 से इसका नाम श्रमिक विद्यापीठ से जन शिक्षण संस्थान कर दिया गया।
 उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा जनवरी, 2018 से देश के सभी जन शिक्षण संस्थानों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय से कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर द्वारा अब तक संचालित 60 प्रकार के विभिन्न पाठ्यक्रमों में अब तक निर्धारित लक्ष्य समूह के 35444 महिला-पुरूषों को विभिन्न कौशल प्रशिक्षणों से लाभान्वित किया गया है।

-ः मुख्य उद्देश्य:-
जिले की शहरी कच्ची बस्तियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के निरक्षर, नवसाक्षर, अल्पशिक्षित, स्कूली ड्राॅप-आउट, सामाजिक आर्थिक दृष्टि से पिछड़े तथा वंचित वर्ग के बेरोजगार महिला-पुरूषों को स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षणों में दक्ष कर उनको सामाजिक एवं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना और जीवन कौशल शिक्षा के माध्यम से उनके व्यक्तित्व का विकास करना।  


-ः लक्ष्य समूह:-
बीकानेर जिले के निरक्षर, नवसाक्षर, अल्पश्क्षिित, स्कूली ड्राॅप-आउट तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े एवं वंचित वर्ग के 15-45 आयुवर्ग के महिला-पुरूष।